14 जनवरी 2022: शामली जिले की सुर्खियां? देखिए- पत्रकार नदीम चौहान के साथ- पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व रालोद के वरिष्ठ नेता प्रसन्न चैधरी को उम्मीदवार बनाकर जो दाव खेला गया है।

शामली। सपा रालोद गठबंधन द्वारा शामली विधानसभा सीट पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व रालोद के वरिष्ठ नेता प्रसन्न चैधरी को उम्मीदवार बनाकर जो दाव खेला गया है। वैसे तो गठबंधन से टिकट की लाईन में वैश्य समाज के एक बडे नेता सहित कई जाट रालोद नेता उम्मीदवारों की लाईन में शिददत के साथ डटे थे, लेकिन हाई कमान ने पूर्व के जिला पंचायत चुनाव में प्रसन्न चैधरी द्वारा जाटों को लाम्बंद किए जाने की रणनीति की सराहना करते हुए दावेदारी को परखा है। वही भाजपा द्वारा मौजूदा विधायक व आरएसएस के पुराने कार्यकर्ता तेजेन्द्र निर्वाल को ही प्रत्याशी घोषित की उनकी साफ छवि व किसी भी प्रकार के विवादों में शामिल न होने जैसे खूबियों के चलते दांव लगाया है। माना यह भी जाता है कि भाजपा का देहात क्षेत्र में भले ही किसानों द्वारा विरोध किया गया हो, लेकिन मौजूद भाजपा विधायक की साफ छवि उनका साथ देने के लिए खडी है। कांग्रेस से वैसे को वैश्य समाज के एक बडे प्रसिद्ध समाज सेवी व वरिष्ठ नेता का नाम काफी चर्चाओं में है, लेकिन उम्मीद किसी ब्रहमण प्रत्याशी पर ही टिकी है। बसपा से अभी तक किसी भी प्रत्याशी द्वारा अपनी दावेदारी पेश नही की गई है अधिकांशतह वरिष्ठ बसपा नेताओं के फोन रेंज से बाहर बताये जा रहे है। आप पार्टी कई माह पूर्व ही जाट प्रत्याशी बिजेन्द्र मलिक को अपना उम्मीदवार घोषित कर मैदान में उतार चुकी है। हालाकि मतदाताओं के होंटों पर चुनावी रणनीति की बात होती है तो शामली विधानसभा सीट पर मुकाबला सपा रालोद गठबंधन व भाजपा के बीच ही होता नजर आ रहा है।
चुनाव आचार संहिता की घोषणा के साथ ही 2022 के विधानसभा चुनाव का बिगुल बच चुका है। 14 फरवरी मकर सक्रांति के दिन नामांकन करने की प्रक्रिया के शुरू होने के साथ ही सपा रालोद गठबंधन व भाजपा द्वारा अपने अपने प्रत्याशियों की सूची को जारी कर दिया है। बात पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक सपा रालोद गठबंधन व भाजपा के बीच सीधे मुकाबले को लेकर जोर शोर से है। रालोद हाईकमान ने तीन दिन दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं व चुनाव समिति के अधिकारियों से वार्ता करके जनपद शामली की शामली विधानसभा सीट पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रसन्न चैधरी पर अपनी मोहर लगा दी है। माना जा रहा है कि प्रसन्न चैधरी के सर्वप्रथम जिला पंचायत के चुनाव में कददावर नेता विरेन्द्र सिंह के खेमे को जाटों को एक सूई के धागे में पिरोकर पटखनी दी थी। उसके बाद से ही लगातार शामली जनपद में प्रसन्न चैधरी को जाटों को लाम्बंद करने का हुनर ही उन्हे प्रत्याशी बनावाने में मुरीद साबित हुआ है। वैसे तो अधिकांशतह जाट समुदाय के लोग रालोद का परंपरागत वोट होने के कारण रालोद को अपनी पहली पार्टी मानकर चलते है, लेकिन प्रसन्न चैधरी को भाजपा जैसी पार्टी के सामने जाटों को लाम्बंद किए जाना आसान नही होगा। क्योकि मौजूदा विधायक तेजेन्द्र निर्वाल की साफ छवि व ईमानदारी भी लोगों की जुबानों पर बढचढकर बोल रही है। मतदाताओं की बात की जाये तो भाजपा पूरी तरह से मुकाबले में बनी हुई है। भाजपा की कई हितकारी योजनाओं का लाभ छोटे तबके को मिलने से मत एकजुट भी हो सकता है।

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