भूख बढ़ गई है !

लगातार बेहतर होने की कोशिश करते रहना, जीत की भूख और किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ रन बनाने की लालसा विराट कोहली को मौजूदा दौर के महान बल्लेबाजों में शामिल करती है। भारत ने साल 2011 में जब महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में आईसीसी वर्ल्ड कप ट्रोफी जीती तो कोहली 22 साल के थे। वानखेड़े स्टेडियम खचाखच भरा था और भारतीय टीम ने 28 साल बाद खिताब पर कब्जा किया था। उस दौरान कोहली, जिन्हें उनके दोस्त और फैंस ‘चीकू’ कहते हैं, न सिर्फ अपनी बल्लेबाजी के हुनर को धार दे रहे थे बल्कि सचिन तेंडुलकर, वीरेंदर सहवाग, युवराज सिंह, धोनी, हरभजन सिंह और जहीर खान जैसे खिलाड़ियो के साथ रहकर दबाव झेलना और उसमें निखरकर प्रदर्शन करने की कला भी सीख रहे थे। पैडी अपटन, उस समय भारतीय टीम के स्ट्रैंथ और मेंटल कंडीशनिंग कोच थे, ने कोहली के इस रूपांतरण के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे थोड़े से ओवरवेट से लेकर दुनिया के सबसे फिट क्रिकेटर तक का सफर कोहली ने कैसे तय किया।अपटन ने कहा, ‘मुझे लगता है कि एक टर्निंग पॉइंट वह रहा जब विराट को अहसास हुआ कि थोड़े से ओवरवेट और औसत दर्जे के फिट हैं और अगर उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल होना है तो उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिट खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल होना होगा। फिटनेस को लेकर उनकी इस बदली सोच ने उन्हें एक बेहद टैलंटेड खिलाड़ी जिसका करियर आराम से चल रहा था, से लेकर, एक बेहद टैलंटेड खिलाड़ी जो अपनी प्रतिभा के साथ पूरा न्याय कर रहा है, तक का सफर तय करवाया।’

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